मोती पिरो के शब्दों के

मोती पिरो के शब्दों के
प्यार का इज़हार करता मगर
समंदर खाली हो गया
मोती पूरे न पड़े

हर तारा तुझे तोहफे में देता
मेरे प्यार की निशानी बना के
मगर कोई तारा तेरी आँखों से ज्यादा
चमक ना सका

हर बगीचे से गुलाब चुरा के
तेरी जुल्फों में सजाता मगर
तुझसे ज्यादा सुन्दर गुलाब
अब तक खिल ना सका

सब कहते हैं मैं बदला बदला सा
लगता हूँ मगर तेरी मोहब्बत
ने मुझे जीना सिखा दिया
यह राज कोई जान ना सका

रोज़ सुबह उठके तुझे भुला देना चाहता हूँ
और रात को तेरी याद में खुद को भुला देना चाहता हूँ
कशमकश बन गयी है ज़िन्दगी तेरे आ जाने से
अब तो तेरे ख्वाब में खुद को पाना चाहता हूँ

नहीं दिखती तू सामने तो क्या हुआ
आइना सब बयां करता है
लोगों से नजरे नहीं मिलाता आजकल
क्यूंकि इनमें तेरा ही चेहरा दिखता है

यू तो डूबते का सहारा था साहिल
मगर तेरे प्यार ने साहिल को डुबो दिया
यह राज़ मैं किसी को बता ना सका

यू तो रोज़ कितनी लहरें साहिल से टकराती हैं
मगर तेरे आने के बाद बस तेरा इंतज़ार रहता है
यह कुछ और नहीं मेरे तसव्वुर का आइना है
यह मैं नहीं कहता यह तो मेरा दिल कहता है

तेरी बातें तेरी तारीफें कभी खत्म ना होंगी
बस मैं भी यही चाहता हूँ
तू सामने हो और मैं बस तेरी ही बातें करू

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