सिर्फ तू ही नहीं ज़िन्दगी में पाने के लिए,
सारा जहां बाकी है जीत जाने के लिए।

मुद्दतों  तड़पा किये दीदार-ए-यार को,
मिलते रहे अक्सर बिछड़ जाने के लिए।

तुम भी तो यार मेरे जैसे ही निकले,
इश्क़ भी किया तो अहसान जताने के लिए।

मैं कैसे मान लू की मेरे हो तुम,
बला का हौसला चाहिए साथ निभाने के लिए।

मंज़िल की तलाश में वो मौज़ों से लड़ा,
फिर आया साहिल पर डूब जाने  के लिए।