कैसे दिखाऊं मैं तुझको

कैसे दिखाऊं मैं तुझको की कितने घाव गहरे हैं
पलक तक आ के तो अब भी ये मेरे अश्क ठहरे हैं


मेरी बातों में झलक तेरी है साँसों में तेरी खुशबू
मेरे अश्कों पे तो अब भी तेरी सूरत के पहरे हैं


कहने को बहुत कुछ है मगर कहूँ तुझे कैसे
लबों पे आ के तो अब भी मेरे अल्फाज़ ठहरे हैं


टूट के बिखरे कहीं कुछ ख्वाब मेरे हैं
कैसे दिखाऊं मैं तुझको की कितने घाव गहरे हैं

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