धड़कन बड़ी बेताब रहती है तेरी चाहत में
तू मिले तो चैन मिल जाये मुझे

मैं तेरे जहाँ में हूँ या नहीं, ये तो नहीं जानता
मगर तू मिले तो जहाँ मिल जाये मुझे

कब से साहिल पे खड़ा राह तकता हूँ तेरी
तेरी बस एक झलक मिल जाये मुझे

कभी फुर्सत हो तो मिलना मुझसे
शायद तेरे दीदार से सुकून मिल जाये मुझे

बस तेरी सादगी के सिवा कुछ नहीं चाहता
तू मिले तो जन्नत मिल जाये मुझे

कभी तो रहम कर मुझ दीवाने पर
शायद तुझ में जीने की राह मिल जाये मुझे